Gubbare

लाल, पीले, हरे, नीले,
प्यारे-प्यारे ये गुब्बारे,
हवा से बातें करते जाते,
सुंदर लगते ये गुब्बारे।

ये गुब्बारे, ये गुब्बारे,
मन को भाएँ ये गुब्बारे।

कोई गुड़िया जैसा लगता,
कोई डक सा प्यारा है,
लाल, पीले, हरे, नीले,
हर रंग कितना न्यारा है।

कभी-कभी मैं ये सोचूँ,
कितने ऊपर ये उड़ते हैं,
आसमान में जाकर क्या ये
चंदा मामा से मिलते हैं?

आसमान में जाकर क्या ये
चंदा मामा से मिलते हैं?

कभी-कभी ये फट भी जाते,
बूम-बूम कर जाते हैं,
छोटे-छोटे बच्चों को ये
हँसा-हँसा कर जाते हैं।

बर्थडे पार्टी या हो मेला,
सबकी शान बढ़ाते हैं,
हम बच्चों को खूब हैं भाते,
खुशियाँ संग ले आते हैं।

लाइट की रोशनी में ये चमकें,
दिन में ये लहराते हैं,
हवा के संग इठलाते-झूमते,
सबका मन बहलाते हैं।

कुछ दिन घर में रखने पर,
पिचक भी जाते ये बेचारे,
फिर भी सबको याद दिलाएँ,
हँसी-खुशी के वो नज़ारे।

लाल, पीले, हरे, नीले,
हमको भाते ये गुब्बारे,
हँसी, खुशी और सपनों वाले,
प्यारे-प्यारे ये gubbare

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